रायपुर। कभी माओवादी हिंसा और भय के साये में जीने वाला बस्तर इस Diwali एक नई उम्मीद, उत्साह और विश्वास के साथ रोशनी का पर्व मना रहा है। जिन इलाकों में कभी पटाखों की आवाज भी सुरक्षा संबंधी आशंकाएं पैदा कर देती थी, वहां अब दीपों की जगमगाहट और त्योहार की खुशियां दिखाई दे रही हैं। करीब चार दशकों तक नक्सली हिंसा का दंश झेलने वाले बस्तर के कई गांवों में इस बार दीपावली का उत्साह खास है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी Diwali के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए जवानों के साथ त्योहार मनाने की अपनी परंपरा जारी रखने की बात कही है। उन्होंने सैनिकों के प्रति सम्मान और उनके साथ दीपावली मनाने के अपने संकल्प को दोहराया। हालांकि, इस बार प्रधानमंत्री का दीपावली कार्यक्रम बस्तर में ही होगा, इसकी आधिकारिक पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
31 मार्च 2026: नक्सलवाद के खिलाफ अभियान का बड़ा पड़ाव
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ लंबे समय से चल रही कार्रवाई ने वर्ष 2026 में एक महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किया। केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। इसके बाद 19 मई 2026 को जगदलपुर में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भारत को नक्सलमुक्त घोषित करते हुए सुरक्षा बलों के जवानों और उनके परिवारों के योगदान को इसका श्रेय दिया।
यह घोषणा उन हजारों जवानों के साहस, संघर्ष और बलिदान की याद दिलाती है, जिन्होंने दुर्गम जंगलों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में देश की सुरक्षा के लिए जिम्मेदारी निभाई। बस्तर की धरती ने इस संघर्ष में आम नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और सुरक्षा बलों के कई परिवारों को खोया है।
जहां कभी त्योहार पर भी रहता था डर, वहां अब उत्सव का माहौल
बस्तर में दीपावली का बदलता स्वरूप केवल रोशनी और सजावट तक सीमित नहीं है। यह सामान्य जनजीवन की वापसी और लोगों के मन में बढ़ते विश्वास का भी प्रतीक है। बीजापुर के गंगालूर और उसूर जैसे इलाकों में पटाखों की दुकानें सजने और ग्रामीणों के खरीदारी के लिए पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। सुकमा के जगरगुंडा से लेकर अबूझमाड़ के दूरस्थ इलाकों तक त्योहार को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है।
पहले कई संवेदनशील गांवों में सुरक्षा कारणों से तेज आवाज वाले पटाखों को लेकर सतर्कता बरती जाती थी। अब ग्रामीणों के लिए त्योहार मनाने का अनुभव बदलता नजर आ रहा है। बच्चों की खुशियां, बाजारों की रौनक और घरों में सजते दीये इस बदलाव की तस्वीर पेश कर रहे हैं।
विकास की नई राह पर बस्तर
नक्सलवाद के प्रभाव से बाहर निकलने के बाद बस्तर के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की है। सड़क, बिजली, मोबाइल नेटवर्क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दे क्षेत्र के भविष्य को तय करेंगे।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मई 2026 में जगदलपुर में कहा था कि नक्सलमुक्त बस्तर को विकसित बस्तर में बदलना अगला लक्ष्य है। केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 12,211 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही मोबाइल टावर, बैंक शाखाएं, एटीएम, डाकघर, एकलव्य मॉडल स्कूल, आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों के विस्तार की जानकारी भी दी गई।
सरकार का दावा है कि इन पहलों से दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों को मुख्यधारा की सुविधाओं से जोड़ने में मदद मिली है। अब इन योजनाओं का वास्तविक लाभ गांवों तक पहुंचे और स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें, यही बस्तर की जनता की बड़ी अपेक्षा है।
जवानों के सम्मान और बलिदान की याद
प्रधानमंत्री मोदी का जवानों के साथ दीपावली मनाने का संकल्प देश की सुरक्षा में तैनात कर्मियों के प्रति सम्मान का प्रतीक है। सीमाओं से लेकर आंतरिक सुरक्षा के चुनौतीपूर्ण मोर्चों तक जवान अपने परिवारों से दूर रहकर कर्तव्य निभाते हैं। बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ चले लंबे अभियान में भी सुरक्षा बलों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
इस दीपावली बस्तर की बदलती तस्वीर के बीच उन जवानों को याद करना भी जरूरी है, जिन्होंने शांति और सुरक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके परिवारों का सम्मान और प्रभावित नागरिकों का पुनर्वास किसी भी विकास अभियान का अहम हिस्सा होना चाहिए।
असली जीत: भयमुक्त जीवन से समृद्ध भविष्य तक
नक्सलवाद का अंत केवल सुरक्षा अभियान की सफलता नहीं, बल्कि बस्तर के लिए एक नई शुरुआत का अवसर है। शांति तभी स्थायी होगी, जब गांवों में शिक्षा मजबूत होगी, युवाओं को रोजगार मिलेगा, स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होंगी और आदिवासी संस्कृति तथा परंपराओं को पूरा सम्मान मिलेगा।
बस्तर की दीपावली इस बार एक बड़ा संदेश दे रही है—अंधेरे से उजाले की ओर बढ़ने का संदेश। अब जरूरत है कि इस रोशनी को विकास, विश्वास और अवसरों की स्थायी रोशनी में बदला जाए। इस बार बस्तर के दीये सिर्फ घरों को नहीं, बल्कि एक नए भविष्य की उम्मीद को भी रोशन कर रहे हैं।







