रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य Mahila Aayog की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू की अध्यक्षता में आज रायपुर स्थित आयोग कार्यालय में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों की जनसुनवाई आयोजित की गई। सुनवाई के लिए कुल 34 प्रकरण रखे गए, जिनमें से 23 प्रकरणों की सुनवाई की गई, जबकि 8 प्रकरण नस्तीबद्ध किए गए। यह प्रदेश स्तर पर आयोग की पांचवीं तथा रायपुर जिले में चौथी जनसुनवाई थी।
सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि अनावेदक ने उसे शादी का झांसा देकर उसका शारीरिक शोषण किया। जब आवेदिका ने उससे विवाह करने के लिए कहा तो अनावेदक द्वारा उसे जान से मारने की धमकी दी जाने लगी। मामले को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने संबंधित थाना को न्यायोचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
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एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि उसका पति पिछले डेढ़ वर्ष से एक अन्य महिला को दूसरी पत्नी के रूप में रखकर अलग रह रहा है। अनावेदक द्वारा आवेदिका और उसकी बेटी से कोई संपर्क नहीं रखा गया है और न ही उनका भरण-पोषण किया जा रहा है। मामले की विस्तार से सुनवाई के बाद आयोग ने आवेदिका को न्यायालय जाने की सलाह दी। साथ ही, प्रकरण के समुचित निराकरण अथवा समाधान होने तक इसे निगरानी में रखने के निर्देश दिए गए।
इसी तरह एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने शिकायत की कि अनावेदक द्वारा विवाह समाप्त करने और घर वापस नहीं आने की बात कहकर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। सुनवाई के दौरान अनावेदक अनुपस्थित रहा। आयोग ने उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए रायगढ़ पुलिस अधीक्षक को पत्र प्रेषित करने का आदेश दिया, ताकि मामले का निराकरण किया जा सके।
एक अन्य मामले में आवेदिका ने भरण-पोषण के लिए शिकायत दर्ज कराई थी। सुनवाई के दौरान उसने बताया कि अनावेदक के दूसरी महिला से अवैध संबंध हैं, जिसके चलते वह आवेदिका और उसके बच्चों का भरण-पोषण नहीं कर रहा है। आवेदिका ने यह भी बताया कि अनावेदक वर्तमान में जेल में है और दूसरी महिला के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराने का प्रयास किया गया था, लेकिन उसका नाम एफआईआर में दर्ज नहीं किया गया। आयोग ने मामले की विस्तार से सुनवाई करते हुए रायपुर एसपी को प्रकरण की जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
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एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने आरोप लगाया कि अनावेदिका उसके बेटे को बिना विवाह के अपने साथ रख रही है। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को सुना गया। दोनों के बीच विवाद और मारपीट की स्थिति सामने आई। दोनों पक्षों का साथ रहना संभव नहीं होने की स्थिति में आयोग ने उन्हें अलग-अलग किराये के मकान में रहने के निर्देश दिए।
वहीं, सामाजिक बहिष्कार से जुड़े एक प्रकरण में आयोग ने अनावेदकगण को आवेदिकागण को पुनः समाज में शामिल करने तथा गलत तरीके से लगाए गए दंड को हटाने के निर्देश दिए।
महिला आयोग की इस जनसुनवाई में पारिवारिक विवाद, महिला उत्पीड़न, भरण-पोषण, वैवाहिक विवाद और सामाजिक बहिष्कार जैसे मामलों पर सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।






