रायपुर। Prabal Pratap Singh Judev : छत्तीसगढ़ में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई को और व्यापक बनाने की तैयारी है। अब पुलिस की कार्रवाई केवल नशे की बिक्री करते पकड़े जाने वाले छोटे आरोपियों तक सीमित रखने के बजाय पूरे तस्करी नेटवर्क और उससे जुड़े आर्थिक तंत्र तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। नशे के कारोबार से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत कुर्क करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
Read More : ‘द जयपुर डायलॉग्स’ में Prabal Pratap Singh Judev की भागीदारी, सनातन मूल्यों और भारतीय सांस्कृतिक पुनरुत्थान पर रखे विचार
भाजपा नेता Prabal Pratap Singh Judev ने इस पहल को लेकर कहा है कि छत्तीसगढ़ में नशे के अवैध कारोबार में शामिल लोगों के लिए अब कोई जगह नहीं होनी चाहिए। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों और नशे की अवैध कमाई से संपत्ति खड़ी करने वाले तस्करों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जरूरी है। उनका कहना है कि प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए केवल गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं, बल्कि इस कारोबार को आर्थिक रूप से भी कमजोर करना होगा।
छोटे पैडलर नहीं, पूरे सिंडिकेट पर होगी कार्रवाई
नशे के अवैध कारोबार में अक्सर छोटे स्तर पर काम करने वाले लोगों की गिरफ्तारी के बाद भी बड़े नेटवर्क का संचालन जारी रहता है। ऐसे में अब तस्करी के पीछे सक्रिय मुख्य संचालकों, वित्तीय मददगारों, सप्लायरों और संगठित गिरोहों तक पहुंचने पर जोर दिया जा रहा है।
29 अक्टूबर 2026 को नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में हुई राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक में उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नशे के कारोबार की पूरी श्रृंखला की जांच की जाए। इसमें उत्पादन, परिवहन, सप्लाई, वितरण और बिक्री से जुड़े सभी स्तरों की पड़ताल शामिल है।
नशे की काली कमाई से बनी संपत्ति होगी जांच के दायरे में
सरकार की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा तस्करों की आर्थिक ताकत पर प्रहार करना है। इसके तहत अवैध कारोबार से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर नियमानुसार कुर्की और जब्ती की कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
वित्तीय लेन-देन की जांच के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट, वित्तीय विशेषज्ञों और कानूनी जानकारों की भागीदारी वाली विशेष समिति गठित करने की भी बात कही गई है। इसका उद्देश्य नशे के कारोबार से जुड़े धन, संपत्ति और आर्थिक नेटवर्क की पड़ताल करना है। संबंधित मामलों में NDPS अधिनियम और SAFEMA के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
स्कूल-कॉलेज के आसपास विशेष निगरानी
नशे का अवैध कारोबार युवाओं और विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए शैक्षणिक संस्थानों के आसपास निगरानी और जागरूकता गतिविधियों को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। पुलिस और संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाकर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने तथा नशे के दुष्प्रभावों के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करने की पहल भी इस अभियान का हिस्सा है।
पहले भी हो चुकी है करोड़ों की संपत्ति फ्रीज
नशे के खिलाफ कार्रवाई में आर्थिक नेटवर्क को निशाना बनाने की दिशा में पहले भी कदम उठाए गए हैं। सितंबर 2026 में विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में 16 आरोपियों से संबंधित लगभग 13.29 करोड़ रुपये की संपत्तियां फ्रीज या जब्त की गई थीं। यह आंकड़ा बताता है कि कार्रवाई का दायरा केवल मादक पदार्थों की जब्ती और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है।
नशामुक्त छत्तीसगढ़ का लक्ष्य
नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए पुलिस, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होगा। केवल तस्करों पर कार्रवाई ही नहीं, बल्कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता और आवश्यक सहायता की व्यवस्था भी अभियान का अहम हिस्सा है।
Read More : BJP का हमला : युवाओं के सपनों का सौदा करने वाली कांग्रेस अब किस मुंह से युवाओं के हित की बात कर रही है? Prabal Pratap Singh Judev
प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर देते हुए इसे युवाओं के भविष्य और समाज की सुरक्षा से जुड़ा विषय बताया है। अब इस अभियान की सफलता इस बात से तय होगी कि निर्देशों का जमीन पर कितना प्रभावी क्रियान्वयन होता है और नशे के कारोबार से जुड़े बड़े नेटवर्क पर कितनी प्रभावी कार्रवाई की जाती है। छत्तीसगढ़ में नशे के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने की यह पहल कानून के प्रभावी पालन, प्रशासनिक जवाबदेही और सामाजिक जागरूकता के समन्वय से ही अपने लक्ष्य तक पहुंच सकेगी।






