रायपुर। राजधानी रायपुर स्थित MATS यूनिवर्सिटी में शनिवार को ‘विकसित भारत के लिए प्रेरक नेतृत्व’ विषय पर विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम एवं वैज्ञानिक विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के पूर्व अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य डॉ. जी. सतीश रेड्डी मुख्य अतिथि और वक्ता के रूप में शामिल हुए।
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विश्वविद्यालय परिसर के कक्ष क्रमांक SF107 में आयोजित कार्यक्रम में 75 से अधिक विद्यार्थियों के साथ विभागाध्यक्षों और प्राध्यापकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को विज्ञान, तकनीक, अनुसंधान और रक्षा क्षेत्र में तेजी से उभर रहे अवसरों से परिचित कराना तथा उन्हें विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका के लिए प्रेरित करना रहा।
ड्रोन, एआई और ऑटोनॉमस सिस्टम पर विशेष जोर
अपने संबोधन में डॉ. जी. सतीश रेड्डी ने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने में युवाओं की वैज्ञानिक सोच तथा तकनीकी नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने रक्षा अनुसंधान, अंतरिक्ष विज्ञान और आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों की जानकारी विद्यार्थियों के साथ साझा की।
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उन्होंने विशेष रूप से ड्रोन टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्वायत्त रक्षा प्रणालियों के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. रेड्डी ने बताया कि आने वाले समय में इन क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले युवाओं के लिए रोजगार, शोध और उद्यमिता के व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने रक्षा निर्माण, राष्ट्रीय अनुसंधान प्रयोगशालाओं और डीप-टेक स्टार्टअप्स को युवाओं के लिए उभरते करियर क्षेत्र बताते हुए विद्यार्थियों से आधुनिक तकनीकों में आवश्यक कौशल विकसित करने का आह्वान किया।
‘तकनीकी नवाचार से बनेगा विकसित भारत’
डॉ. रेड्डी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए वैज्ञानिक क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और स्वदेशी नवाचार को भी मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को जिज्ञासा, अनुसंधान की प्रवृत्ति और समस्या के नए समाधान तलाशने की सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि स्वदेशी ड्रोन, एयरोस्पेस, एआई और रक्षा तकनीक जैसे क्षेत्र आने वाले वर्षों में भारत की तकनीकी क्षमता को नई ऊंचाई दे सकते हैं और युवाओं के लिए करियर के नए रास्ते खोल सकते हैं।
विद्यार्थियों से सीधा संवाद
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा विद्यार्थियों के साथ प्रश्नोत्तर सत्र रहा। 75 से अधिक विद्यार्थियों ने डॉ. रेड्डी से करियर, शोध, रक्षा तकनीक और आधुनिक वैज्ञानिक क्षेत्रों से जुड़े सवाल पूछे। डॉ. रेड्डी ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का जवाब देते हुए उन्हें उच्च तकनीकी क्षेत्रों में करियर की संभावनाओं और शोध के महत्व के बारे में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को केवल नौकरी की तलाश तक सीमित न रहते हुए अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप के माध्यम से नई तकनीकों के विकास में योगदान देने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
विश्वविद्यालय प्रबंधन की रही प्रमुख भूमिका
कार्यक्रम में मैट्स यूनिवर्सिटी के प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे। इनमें कुलाधिपति गजराज पगारिया, महानिदेशक प्रियेश पगारिया, कुलपति डॉ. के. पी. यादव और कुलसचिव गोकुलानंद पांडा प्रमुख रूप से शामिल रहे।
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कुलपति डॉ. के. पी. यादव ने डॉ. जी. सतीश रेड्डी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ शोध, नवाचार और उद्योग-उन्मुख अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि ऐसे विशेषज्ञ व्याख्यान विद्यार्थियों को कक्षा से बाहर वास्तविक तकनीकी और वैज्ञानिक दुनिया से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शोध और नवाचार को मिलेगा नया प्रोत्साहन
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय स्तर पर होने वाले शोध कार्यों को राष्ट्रीय विकास से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने इस बात को रेखांकित किया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में होने वाला शोध देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
कार्यक्रम के समापन पर MATS यूनिवर्सिटी के कुलसचिव गोकुलानंद पांडा ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने मुख्य अतिथि डॉ. जी. सतीश रेड्डी, विश्वविद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस विशेषज्ञ व्याख्यान ने MATS यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों को रक्षा तकनीक, एआई, ड्रोन, अंतरिक्ष विज्ञान और डीप-टेक जैसे तेजी से विकसित होते क्षेत्रों में करियर और शोध की संभावनाओं को समझने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।







