रायपुर। CG NEWS : छत्तीसगढ़ राज्य कृषि विपणन मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक महेंद्र सिंह सवन्नी की सेवानिवृत्ति के बाद जारी संविदा नियुक्ति को लेकर विवाद एक बार फिर सामने आया है। छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच ने आरोप लगाया है कि सवन्नी सेवानिवृत्ति के बाद लगातार सेवा-विस्तार प्राप्त कर पद पर बने हुए हैं। मंच ने इन नियुक्तियों की वैधानिकता और प्रक्रिया को सार्वजनिक किए जाने की मांग की है।
रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में मंच के अध्यक्ष पूरनलाल साहू ने दावा किया कि सवन्नी 30 जून 2024 को सेवानिवृत्त होने के बाद भी मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक पद पर संविदा आधार पर कार्यरत हैं। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में भी उनके 30 जून 2024 को सेवानिवृत्त होने और इसके बाद प्रबंध संचालक पद पर संविदा नियुक्ति दिए जाने का उल्लेख मिलता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रारंभिक संविदा नियुक्ति छह माह के लिए की गई थी।
पांच एक्सटेंशन को लेकर सवाल
CG NEWS : मंच का मुख्य सवाल यह है कि सेवानिवृत्ति के बाद सवन्नी को अब तक कितनी बार और किन-किन आदेशों के आधार पर सेवा-विस्तार दिया गया। मंच ने दावा किया है कि उन्हें पांच बार एक्सटेंशन दिया गया है और इन सभी आदेशों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
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इससे पहले सितंबर 2026 में मंडी बोर्ड के कर्मचारियों से जुड़े संगठनों की ओर से भी सवन्नी की संविदा नियुक्ति को लेकर शिकायत और विरोध की खबरें सामने आई थीं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कर्मचारी संगठनों ने उनकी संविदा नियुक्ति निरस्त करने की मांग उठाई थी और एक हस्ताक्षर अभियान में 245 अधिकारी-कर्मचारियों के शामिल होने का दावा किया गया था। इन शिकायतों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
नियमों का हवाला देकर मंच ने उठाए सवाल
पूरनलाल साहू ने प्रेस वार्ता में FR-56(2)(a) और सामान्य प्रशासन विभाग के कथित आदेश F-3/14/2010 का हवाला देते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति और उसके बाद की नियुक्ति को लेकर निर्धारित नियमों का पालन होना चाहिए।
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हालांकि, इन दोनों प्रावधानों की सटीक लागू स्थिति और मंडी बोर्ड के संविदा पद पर उनकी व्याख्या की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है। इसलिए मंच द्वारा किए गए इन कानूनी दावों को फिलहाल मंच के पक्ष/दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला
मंच ने अपने पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के State of Assam vs. Ripa Sarma, (2013) 3 SCC 63 मामले का भी उल्लेख किया। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, यह फैसला मुख्य रूप से एक विशेष अनुमति याचिका की maintainability और review order को चुनौती से जुड़े प्रश्न पर था तथा इसमें per incuriam के सिद्धांत पर चर्चा हुई थी। उपलब्ध फैसले में बार-बार सरकारी सेवा-विस्तार को युवाओं के अधिकारों का उल्लंघन घोषित करने वाली बात नहीं मिलती।
इसलिए मंच द्वारा इस फैसले की जो व्याख्या प्रेस वार्ता में प्रस्तुत की गई है, उसे न्यायालय के फैसले की प्रत्यक्ष भाषा के बजाय मंच की कानूनी व्याख्या के रूप में रिपोर्ट करना अधिक उचित होगा।
युवाओं के अवसर और पदोन्नति का मुद्दा
साहू ने कहा कि सरकार एक ओर युवाओं को रोजगार और अवसर उपलब्ध कराने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर सेवानिवृत्त अधिकारी को लगातार सेवा-विस्तार देकर पद पर बनाए रखने से विभागीय अधिकारियों की पदोन्नति और नए अवसर प्रभावित हो सकते हैं। मंच का दावा है कि मंडी बोर्ड में कई अधिकारी पदोन्नति की प्रतीक्षा में हैं।
मंडी बोर्ड में सवन्नी की नियुक्ति को लेकर इससे पहले भी सवाल उठते रहे हैं। सितंबर 2026 की प्रकाशित रिपोर्टों में कर्मचारियों द्वारा उनकी संविदा नियुक्ति तथा कार्यप्रणाली की जांच की मांग किए जाने का उल्लेख है। संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया के संबंध में कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि उनका पक्ष सामने आना बाकी है।
मंच ने रखीं तीन प्रमुख मांगें
छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—
महेंद्र सवन्नी को दिए गए सभी सेवा-विस्तार/संविदा नियुक्ति आदेश सार्वजनिक किए जाएं और उनकी वैधानिकता की समीक्षा की जाए।
पूरे मामले की जांच मुख्य सचिव स्तर से कराई जाए।
मंडी बोर्ड में नियमों के अनुरूप नियमित प्रबंध संचालक की नियुक्ति की जाए।
मंच ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं होती है, तो वह मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
अब निगाह शासन के फैसले पर
मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक की संविदा नियुक्ति को लेकर उठे इन सवालों के बीच अब मुख्य मुद्दा नियुक्ति के आदेशों, सेवा-विस्तार की अवधि और उन पर लागू नियमों की वास्तविक स्थिति का है। उपलब्ध रिपोर्टों से यह स्पष्ट है कि सवन्नी की संविदा नियुक्ति को लेकर कर्मचारी संगठनों की ओर से पहले भी आपत्तियां सामने आ चुकी हैं। ऐसे में विवाद का अंतिम निष्कर्ष संबंधित सरकारी आदेशों, नियुक्ति अभिलेखों और सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जाने वाली जांच के आधार पर ही तय होगा। फिलहाल छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच ने सरकार से दस्तावेज सार्वजनिक करने और मामले की जांच कराने की मांग तेज कर दी है।






