दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में भाजपा ने ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत राजनीतिक शक्ति और संगठनात्मक एकजुटता का प्रदर्शन किया। पुलगांव स्थित महेश कॉलोनी में आयोजित आमसभा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री JP Nadda, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। सभा के मंच से भाजपा ने निर्वाचन आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए और कांग्रेस को निशाने पर लिया।
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सभा को संबोधित करते हुए JP Nadda ने कांग्रेस पर चुनावी परिणामों के आधार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत मिलने पर विपक्ष अपनी सफलता का श्रेय लेता है, लेकिन हारने पर निर्वाचन आयोग और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने लगता है। नड्डा ने इसे राजनीतिक अराजकता बताते हुए कहा कि देश को ऐसी प्रवृत्तियों से बचाने की आवश्यकता है। उन्होंने विपक्ष पर SIR को लेकर भ्रम फैलाने और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति अविश्वास का माहौल बनाने का भी आरोप लगाया।
SIR बना सियासी टकराव का केंद्र
दरअसल, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर देश की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं। भाजपा इसे मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और पारदर्शी बनाने की प्रक्रिया बता रही है। वहीं कांग्रेस और INDIA गठबंधन इस प्रक्रिया की निष्पक्षता और संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दल मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं।
इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में दुर्ग की सभा को भाजपा के लिए अपने पक्ष को सार्वजनिक रूप से रखने और कार्यकर्ताओं को लामबंद करने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी ने अभियान के जरिए SIR के मुद्दे को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने के साथ विपक्ष की रणनीति पर भी निशाना साधा।
राजनीतिक संदेश के साथ संगठन की परीक्षा
दुर्ग का यह आयोजन केवल एक आमसभा और पदयात्रा तक सीमित नहीं रहा। इसके जरिए भाजपा ने SIR के मुद्दे पर अपना पक्ष रखने, विपक्ष को चुनौती देने और संगठन की सक्रियता प्रदर्शित करने की कोशिश की। राष्ट्रीय नेतृत्व की मौजूदगी ने कार्यक्रम को राजनीतिक महत्व दिया, वहीं मुख्यमंत्री सहित प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी ने इसे राज्य की राजनीति से भी जोड़ दिया।
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हालांकि, विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा के निधन के कारण पदयात्रा पूरी नहीं हो सकी। ऐसे में दुर्ग का यह कार्यक्रम एक ओर भाजपा के राजनीतिक अभियान और संगठनात्मक शक्ति प्रदर्शन के रूप में सामने आया, तो दूसरी ओर पार्टी के लिए गहरे शोक का अवसर भी बन गया।







