रायपुर। CG NEWS : छत्तीसगढ़ के डीएड अभ्यर्थियों की इस वर्ष की दिवाली खुशियों के बजाय निराशा और इंतजार के बीच बीती। प्रदेश के हजारों डीएड अभ्यर्थी अपने 2300 सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर पिछले 325 दिनों से राजधानी रायपुर के तूता धरना स्थल पर आंदोलनरत हैं। परिवार के साथ दिवाली मनाने और घर में खुशियां बांटने के बजाय अभ्यर्थियों को धरना स्थल पर ही अपनी रातें गुजारनी पड़ीं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि एक तरफ प्रदेश सरकार सुशासन, न्याय और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की बातें करती है, वहीं दूसरी तरफ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद भी नियुक्ति की मांग को लेकर युवाओं को 325 दिनों से सड़क पर बैठना पड़ रहा है। आखिर न्यायालय के आदेशों के पालन और पात्र अभ्यर्थियों को उनका अधिकार दिलाने में इतनी देरी क्यों हो रही है?
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CG NEWS : अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया कि जिस सरकार से युवाओं को रोजगार और न्याय की उम्मीद थी, उसी सरकार के कार्यकाल में हजारों प्रशिक्षित युवाओं को अपनी नियुक्ति के लिए त्योहार तक धरना स्थल पर बिताने पड़ रहे हैं। यह स्थिति सरकार की युवा रोजगार नीति और सुशासन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि 2300 सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति केवल रोजगार का मुद्दा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य, वर्षों की मेहनत और न्यायालयीन आदेशों के सम्मान का सवाल है। कई अभ्यर्थियों के माता-पिता भी अपने बच्चों के भविष्य की चिंता में आंदोलन का हिस्सा बन रहे हैं। आर्थिक परेशानियों, मानसिक तनाव और लगातार संघर्ष के बावजूद अभ्यर्थियों ने अपनी मांग नहीं छोड़ी है।
CG NEWS : डीएड अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से मांग की है कि न्यायालयीन आदेशों के अनुरूप भर्ती प्रक्रिया में आवश्यक कार्रवाई करते हुए 2300 सहायक शिक्षक पदों पर पात्र डीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए तथा नियुक्ति की स्पष्ट समय-सीमा घोषित की जाए।
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अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार के लिए दिवाली रोशनी और खुशियों का त्योहार हो सकती है, लेकिन नियुक्ति की बाट जोह रहे डीएड युवाओं के लिए इस बार भी दिवाली अधूरे सपनों और इंतजार के अंधेरे में बीती। 325 दिनों का यह संघर्ष अब सिर्फ नौकरी की मांग नहीं, बल्कि न्याय, सम्मान और भविष्य की लड़ाई बन चुका है।






