रायपुर। CG NEWS : छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और ग्रामीण रोजगार को नई पहचान देने के उद्देश्य से राज्योत्सव में ग्रामोद्योग विभाग द्वारा विशेष पहल की गई। शिल्पग्राम परिसर में तैयार ‘शिल्प कुंज’ और हाथकरघा संघ के प्रीमियम ब्रांड ‘कोशल फेब्स’ के माध्यम से प्रदेश के बुनकरों, शिल्पियों, कारीगरों एवं कृमिपालकों की प्रतिभा को प्रदर्शित किया गया। इस बार की विशेषता यह रही कि पारंपरिक उत्पादों के प्रदर्शन के साथ क्यूआर कोड के जरिए कारीगरों की जीवन यात्रा और सफलता की कहानियों को भी आम नागरिकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेन्द्र यादव के निर्देशानुसार ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा के मार्गदर्शन में शिल्पग्राम में विभाग के विभिन्न घटकों को एक मंच पर लाया गया। रेशम, हाथकरघा, खादी एवं ग्रामोद्योग, माटीकला बोर्ड तथा हस्तशिल्प विकास बोर्ड के माध्यम से प्रदेश के उत्कृष्ट बुनकरों और कारीगरों द्वारा तैयार उत्पादों का जीवंत प्रदर्शन किया गया।
शिल्प कुंज में परंपरा और आधुनिक डिजाइन का संगम
शिल्पग्राम परिसर में निर्मित शिल्प कुंज में हाथकरघा संघ के प्रीमियम ब्रांड कोशल फेब्स के अंतर्गत तैयार वस्त्रों एवं नवीन डिजाइन वाले उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। बुनकरों द्वारा निर्मित अलसी जैकेट, बस्तर एवं सुकमा जिले की पुनर्वासित महिलाओं द्वारा तैयार सॉफ्ट टॉयज, कीचेन और विभिन्न प्रकार के खिलौने दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहे। इसके अलावा हाथकरघा संघ के उपलब्ध वस्त्रों को नए डिजाइन के साथ उपयोगी होम डेकोर उत्पादों में विकसित किया गया। इनमें वॉटर बैग, टिफिन बैग, टेबल रनर, वॉल डेकोर, सोफा कवर, पैरदान, योगा ड्रेस और योगा मैट जैसे उत्पाद शामिल रहे। ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए विकसित आकर्षक एवं पर्यावरण अनुकूल सीट कवर भी प्रदर्शित किए गए। पारंपरिक हाथकरघा वस्त्रों को आधुनिक उपयोग के अनुरूप तैयार करने की यह पहल स्थानीय कारीगरी को नए बाजार और उपयोगिता से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण रही।

पहली बार पुनर्वासित महिलाओं और बुनकर परिवारों के बच्चों का रैम्प वॉक
राज्योत्सव में इस बार हाथकरघा वस्त्रों के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष आयोजन किया गया। बस्तर एवं सुकमा जिले की पुनर्वासित महिलाओं तथा बुनकरों के पुत्र-पुत्रियों ने हाथकरघा वस्त्रों से तैयार परिधानों में रैम्प वॉक किया। पारंपरिक कपड़ों को आधुनिक परिधान शैली में प्रस्तुत करने वाले इस आयोजन को दर्शकों ने खूब पसंद किया। इससे हाथकरघा वस्त्रों की विविधता, डिजाइन और उपयोगिता को प्रदर्शित करने का अवसर मिला। यह आयोजन केवल वस्त्रों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बुनकर परिवारों और पुनर्वासित महिलाओं की भागीदारी के माध्यम से उनकी कला और मेहनत को भी सामने लाया गया।
QR कोड से कारीगरों की सफलता की कहानियां
शिल्पग्राम में इस बार तकनीक के माध्यम से छत्तीसगढ़ की शिल्प विरासत को आम नागरिकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। ग्रामोद्योग विभाग के बुनकरों, शिल्पियों, कारीगरों और कृमिपालक हितग्राहियों के जीवन इतिहास एवं सफलता की कहानियों को क्यूआर कोड के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इस पहल के जरिए दर्शकों को उत्पादों के साथ उन्हें बनाने वाले कारीगरों की मेहनत, अनुभव और उपलब्धियों से परिचित होने का अवसर मिला। पारंपरिक कला को डिजिटल माध्यम से जोड़ने का यह प्रयास शिल्पकारों की पहचान और उनके कार्यों के प्रचार-प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण रहा। शिल्प कुंज में हस्तशिल्प, माटीकला और खादी बोर्ड के उत्पादों का भी जीवंत प्रदर्शन किया गया। विभिन्न जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों और आम नागरिकों ने प्रदर्शित सामग्रियों एवं विभागीय प्रयासों की सराहना की।
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रेशम उत्पादन की प्रक्रिया का जीवंत प्रदर्शन
राज्योत्सव के शिल्पग्राम परिसर में रेशम विभाग द्वारा भी विशेष प्रदर्शन किया गया। विभाग की ओर से टसर एवं महाबरी कृमि पालन, धागाकरण और अमारी रेशम सेतु का जीवंत प्रदर्शन किया गया। रेशम उत्पादन से जुड़ी प्रक्रियाओं को प्रदर्शित करने के माध्यम से नागरिकों को इस पारंपरिक उद्योग के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर मिला। रेशम उत्पादन, हाथकरघा, खादी, हस्तशिल्प और माटीकला को एक ही परिसर में प्रदर्शित करने से ग्रामोद्योग की विविध गतिविधियों को व्यापक मंच मिला।
64 स्टॉलों में प्रदेश की पारंपरिक कला और उत्पाद
शिल्पग्राम में ग्रामोद्योग विभाग के विभिन्न घटकों के अंतर्गत कुल 64 स्टॉल लगाए गए थे। इनमें हाथकरघा, रेशम, हस्तशिल्प, खादी बोर्ड और माटीकला से संबंधित उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय किया गया। तीन दिवसीय राज्योत्सव के दौरान हाथकरघा वस्त्रों, हस्तशिल्प सामग्रियों, माटीकला उत्पादों तथा खादी वस्त्रों और सामग्रियों की बिक्री के माध्यम से कुल 52.84 लाख रुपये का कारोबार दर्ज किया गया। विभागीय जानकारी के अनुसार, हाथकरघा वस्त्रों की बिक्री से 33.57 लाख रुपये, हस्तशिल्प सामग्रियों से 12.80 लाख रुपये, माटीकला उत्पादों से 4.11 लाख रुपये तथा खादी वस्त्रों एवं सामग्रियों से 2.36 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई। इस प्रकार राज्योत्सव में ग्रामोद्योग विभाग के विभिन्न उत्पादों को नागरिकों के बीच प्रदर्शित करने के साथ उनके विक्रय का भी अवसर मिला।
स्थानीय कारीगरों को बाजार से जोड़ने की पहल
राज्योत्सव में शिल्प कुंज और कोशल फेब्स के माध्यम से प्रदेश की पारंपरिक कला को आधुनिक डिजाइन, डिजिटल तकनीक और बाजार से जोड़ने का प्रयास किया गया। बुनकरों, पुनर्वासित महिलाओं, शिल्पियों और ग्रामीण हितग्राहियों द्वारा तैयार उत्पादों को एक मंच पर प्रदर्शित करने से उनकी कला को व्यापक पहचान मिली। QR कोड के जरिए कारीगरों की सफलता की कहानियों को प्रस्तुत करना, हाथकरघा वस्त्रों का रैम्प वॉक और विभिन्न ग्रामोद्योग उत्पादों का जीवंत प्रदर्शन इस आयोजन की प्रमुख विशेषताएं रहीं। राज्योत्सव में ग्रामोद्योग विभाग की यह पहल छत्तीसगढ़ की पारंपरिक विरासत को संरक्षित करने, स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण कारीगरों की मेहनत को नई पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में सामने आई।






