रायपुर। Chhattisgarh में जूनियर डॉक्टरों के आंदोलन ने अब स्वास्थ्य सेवाओं पर असर डालने की स्थिति पैदा कर दी है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेश के जूनियर डॉक्टर आज OPD सेवाओं के बहिष्कार पर हैं। इसके चलते सरकारी मेडिकल कॉलेजों और उनसे संबद्ध अस्पतालों में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय से रखी जा रही मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण उनमें नाराजगी बढ़ रही है। इसी के चलते आंदोलन के अगले चरण के तहत OPD का बहिष्कार किया जा रहा है।
OPD सेवाएं प्रभावित होने की संभावना
OPD में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज उपचार और परामर्श के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में जूनियर डॉक्टरों के OPD बहिष्कार से सरकारी अस्पतालों में मरीजों की जांच, परामर्श और नियमित चिकित्सा सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है।
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हालांकि, मरीजों को ज्यादा परेशानी न हो, इसके लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने का दावा किया गया है। इसके बावजूद OPD में मरीजों की संख्या और उपलब्ध चिकित्सा स्टाफ के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
28 सितंबर के बाद आंदोलन होगा और तेज
जूनियर डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर 28 सितंबर तक ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। इसके बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है।
ऐसे में आने वाले दिनों में यदि गतिरोध दूर नहीं हुआ तो सरकारी अस्पतालों की नियमित स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
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मरीजों के लिए बढ़ सकती है परेशानी
जूनियर डॉक्टरों की भूमिका सरकारी मेडिकल कॉलेजों और संबद्ध अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्था में महत्वपूर्ण होती है। OPD बहिष्कार के बाद जहां अस्पताल प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए सेवाएं संचालित करने की कोशिश करेगा, वहीं अनिश्चितकालीन हड़ताल की स्थिति में व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
फिलहाल जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन मांगों के समाधान और सरकार की कार्रवाई पर टिका हुआ है। अब देखना होगा कि 28 सितंबर की समयसीमा से पहले दोनों पक्षों के बीच कोई समाधान निकलता है या आंदोलन आगे बढ़ता है। रायपुर समेत प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और संबद्ध अस्पतालों में आज की OPD व्यवस्था पर मरीजों की नजर बनी हुई है।






