रायपुर। Prabal Pratap Singh Judev : छत्तीसगढ़ केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय परंपराओं, लोककला, परिश्रम और स्वाभिमान से विशिष्ट पहचान रखने वाला प्रदेश है। यहां की मिट्टी में संघर्ष की गाथाएं हैं तो जनमानस में बेहतर भविष्य गढ़ने का संकल्प भी। राज्य स्थापना दिवस इसी गौरवशाली यात्रा, जनभावनाओं और विकास की आकांक्षाओं को स्मरण करने का विशेष अवसर है।
राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को रेखांकित किया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि अटूट इच्छाशक्ति, अदम्य साहस और निरंतर परिश्रम के माध्यम से छत्तीसगढ़ ने अपनी अलग पहचान स्थापित की है। वीरों, मेहनतकशों और स्वाभिमानी लोगों की यह धरती निरंतर विकास, समृद्धि और नई संभावनाओं की ओर आगे बढ़ रही है।
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छत्तीसगढ़ की पहचान यहां की विविधतापूर्ण संस्कृति में भी दिखाई देती है। बस्तर की जनजातीय परंपराओं से लेकर सरगुजा की लोकसंस्कृति तक, लोकनृत्य, लोकगीत, हस्तशिल्प और पारंपरिक जीवनशैली प्रदेश की विशिष्ट विरासत को प्रदर्शित करते हैं। यह सांस्कृतिक विविधता ही छत्तीसगढ़ की सामाजिक एकता और पहचान का महत्वपूर्ण आधार है।
Prabal Pratap Singh Judev : राज्य गठन के बाद से प्रदेश ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी विकास यात्रा तय की है। कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, सड़क, बिजली और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के साथ विकास की अनेक संभावनाएं सामने आई हैं। हालांकि, समावेशी विकास, रोजगार के अवसर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती और युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करना आज भी महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं हैं।
स्थापना दिवस का अवसर केवल उपलब्धियों का उत्सव मनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि भविष्य की चुनौतियों और जिम्मेदारियों पर विचार करने का भी अवसर है। विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना तभी साकार होगी, जब प्रदेश का प्रत्येक क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से जुड़े और समाज के हर वर्ग को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें।
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Prabal Pratap Singh Judev ने प्रदेशवासियों से इस गौरवशाली अवसर पर विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागी बनने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उनका संदेश प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, विकास की निरंतरता और सामूहिक प्रयासों के महत्व को सामने रखता है।
संघर्ष से संकल्प तक और संकल्प से सफलता तक की यात्रा ही छत्तीसगढ़ की पहचान है। इसी भावना के साथ प्रदेश एक उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर हो, यही राज्य स्थापना दिवस की सार्थक कामना है।
जय छत्तीसगढ़! जय जोहार!






