रायपुर। RAIPUR NEWS : छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के पूर्व अध्यक्ष सुशील सन्नी अग्रवाल ने प्रदेश में श्रमिक कल्याण योजनाओं के लंबित आवेदनों को लेकर राज्य सरकार और श्रम विभाग पर निशाना साधा है। अग्रवाल ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण बड़ी संख्या में पंजीकृत श्रमिक विभिन्न योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। अग्रवाल द्वारा जारी बयान के अनुसार, पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कर्मकार मंडल के माध्यम से करीब 30 जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही थीं और पंजीकृत श्रमिकों को इनका लाभ मिलने का दावा किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बड़ी संख्या में आवेदन लंबित हैं।
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रायपुर समेत कई जिलों में लंबित आवेदनों का दावा
सुशील सन्नी अग्रवाल ने अपने बयान में विभागीय आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि रायपुर में 86,812, धमतरी में 80,009, दुर्ग में 43,556, महासमुंद में 22,346 और गरियाबंद में 26,194 आवेदन लंबित हैं। उनके अनुसार, प्रदेशभर में लंबित आवेदनों की संख्या 12,20,620 बताई गई है।
उन्होंने विभिन्न योजनाओं में लंबित आवेदनों का भी उल्लेख किया। उनके दावे के मुताबिक, नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना में 3,56,556 तथा बच्चों के गणवेश एवं पुस्तक-कॉपी से संबंधित योजना में 1,67,922 आवेदन लंबित हैं। उन्होंने कुल 6,10,310 योजना आवेदनों के लंबित होने का भी दावा किया।
अग्रवाल ने कहा कि ये आंकड़े श्रमिकों को योजनाओं का लाभ दिलाने की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं और लंबित आवेदनों का शीघ्र निराकरण किया जाना चाहिए।
ई-केवाईसी को लेकर भी उठाए सवाल
पूर्व मंडल अध्यक्ष ने ई-केवाईसी की प्रक्रिया को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि ई-केवाईसी के नाम पर श्रमिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और बड़ी संख्या में श्रमिक योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया में अटक रहे हैं।
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उन्होंने ब्लॉक स्तर पर संचालित श्रम संसाधन केंद्रों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इन केंद्रों से श्रमिकों को अपेक्षित सहायता और मार्गदर्शन नहीं मिल रहा है।
योजनाओं के नाम बदलने का आरोप
अग्रवाल ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार जिन श्रमिक कल्याणकारी योजनाओं को अपनी उपलब्धि के तौर पर प्रस्तुत कर रही है, उनमें से कई योजनाओं की शुरुआत पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान हुई थी। उन्होंने दावा किया कि कुछ योजनाओं के नाम में बदलाव कर उन्हें वर्तमान सरकार की योजनाओं के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।
श्रम मंत्री और विभागीय अधिकारियों पर लगाए आरोप
अपने बयान में अग्रवाल ने श्रम मंत्री की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि श्रमिकों से जुड़े विभागीय कामकाज पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों और चॉइस सेंटरों के बीच कथित मिलीभगत का भी आरोप लगाया।
अग्रवाल ने कुछ व्यक्तियों के नाम लेते हुए ट्रांसफर, फैक्ट्री लाइसेंस, बार लाइसेंस और चॉइस सेंटरों से जुड़े मामलों में कथित लेन-देन के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, ये आरोप उनके बयान पर आधारित हैं और संबंधित व्यक्तियों अथवा विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया इस बयान में उपलब्ध नहीं है।
पंजीयन और पात्रता की शर्तों में बदलाव का दावा
अग्रवाल ने कहा कि पूर्व व्यवस्था में मंडल की कई योजनाओं का लाभ पंजीयन के 90 दिन बाद मिलने की व्यवस्था थी। उनका दावा है कि वर्तमान में कुछ योजनाओं में लाभ लेने के लिए अधिक लंबी पात्रता अवधि निर्धारित कर दी गई है, जिसके चलते श्रमिकों को लाभ मिलने में देरी हो रही है।
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उन्होंने सरकार द्वारा आयोजित श्रमिक सम्मेलनों और कार्यक्रमों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि केवल आयोजन करने के बजाय सरकार को लंबित आवेदनों के निराकरण और श्रमिकों को वास्तविक लाभ पहुंचाने पर ध्यान देना चाहिए।
लंबित आवेदनों के तत्काल निराकरण की मांग
सुशील सन्नी अग्रवाल ने सरकार से मांग की है कि जिलों में लंबित श्रमिक कल्याण योजनाओं के आवेदनों का तत्काल निराकरण किया जाए और पात्र श्रमिकों को उनका हक दिलाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लंबित मामलों का जल्द समाधान नहीं हुआ तो कांग्रेस श्रमिकों के अधिकारों को लेकर आंदोलन करेगी।







