कोरबा। KORBA BREAKING : SECL के दीपका मेगा प्रोजेक्ट में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब खदान क्षेत्र में संचालित एक निजी कंपनी के भारी-भरकम डंपर में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरे वाहन को अपनी चपेट में ले लिया और डंपर धू-धूकर जलने लगा। हादसे में वाहन पूरी तरह जलकर खाक हो गया। जानकारी के मुताबिक, कलिंगा कमर्शियल कंपनी के डंपर में अचानक इंजन की तरफ से धुआं निकलता दिखाई दिया। चालक ने स्थिति को भांपते हुए तत्काल सतर्कता बरती। इसके कुछ ही देर बाद वाहन में आग भड़क उठी और तेजी से फैलती चली गई।
दमकल और सुरक्षा अमला मौके पर
आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग और SECL का सुरक्षा अमला मौके पर पहुंचा। आग की भयावहता को देखते हुए काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। राहत की बात यह रही कि चालक की सूझबूझ और समय रहते उठाए गए कदमों के कारण किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। बताया जा रहा है कि आग की प्रारंभिक वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। हालांकि, आग लगने के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
करीब दो करोड़ के वाहन के जलने से बड़ा नुकसान
हादसे में निजी कंपनी का डंपर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इसकी कीमत करीब 2 करोड़ रुपये बताई जा रही है। ऐसे में आग की घटना से कंपनी को बड़ा आर्थिक नुकसान होने की बात सामने आ रही है।
खदान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
घटना के बाद दीपका मेगा प्रोजेक्ट में भारी वाहनों की मेंटेनेंस व्यवस्था, इलेक्ट्रिकल सिस्टम और फायर सेफ्टी इंतजामों को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। कोयला खदान जैसे संवेदनशील और जोखिम वाले क्षेत्र में बड़े वाहनों के संचालन के दौरान आग से बचाव की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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अब सवाल यह है कि डंपर में आग लगने से पहले क्या वाहन की नियमित तकनीकी जांच और मेंटेनेंस किया गया था? इलेक्ट्रिकल सिस्टम में किसी खराबी के संकेत पहले से मौजूद थे या नहीं? साथ ही, खदान क्षेत्र में आपात स्थिति से निपटने के लिए उपलब्ध फायर सेफ्टी संसाधन कितने प्रभावी हैं—इन पहलुओं पर भी जांच की जरूरत महसूस की जा रही है। फिलहाल घटना के कारणों की विस्तृत जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आग तकनीकी खराबी, शॉर्ट सर्किट या किसी अन्य कारण से लगी थी। हादसे ने एक बार फिर खदान क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों और भारी मशीनरी के रखरखाव को लेकर गंभीर चर्चा छेड़ दी है।







