रायपुर। CG NEWS : किसानों की आर्थिक मजबूती, कृषि सुविधाओं का विस्तार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य के साथ छत्तीसगढ़ सरकार कृषि क्षेत्र में कई स्तरों पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से मिलने वाली आर्थिक सहायता से लेकर समर्थन मूल्य पर धान खरीदी, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को राहत देने तक सरकार ने अपनी प्राथमिकताएं सामने रखी हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि किसानों की समृद्धि ही गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का आधार है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत छत्तीसगढ़ के किसानों को अब तक 24 किस्तों में 11 हजार 776 करोड़ 50 लाख रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से राशि पहुंचने से सहायता वितरण में पारदर्शिता और सुगमता आई है। उन्होंने कहा कि खेती के लिए बीज, खाद, उर्वरक और अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था करने में यह आर्थिक सहायता विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रही है।
CG NEWS : मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसान परिवारों की छोटी-छोटी आर्थिक जरूरतों को समझते हुए शुरू की गई यह योजना उन्हें खेती-किसानी के संचालन में संबल प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों की आय और कृषि क्षेत्र की उत्पादकता में वृद्धि से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
15 नवंबर से धान खरीदी, 360 नए केंद्रों से मिलेगी सुविधा
प्रदेश के किसानों के लिए खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की धान खरीदी 15 नवंबर से प्रारंभ होगी। राज्य सरकार के अनुसार किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदा जाएगा। खरीदी व्यवस्था को किसानों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से प्रदेश में 360 नए धान उपार्जन केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए केंद्र शुरू होने से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। इससे समय और परिवहन खर्च में भी राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का प्रयास है कि उपार्जन केंद्रों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहें और धान खरीदी की प्रक्रिया पारदर्शी तथा व्यवस्थित तरीके से पूरी हो। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।
चक्रवात से फसल नुकसान का सर्वे, प्रभावित किसानों को मिलेगी सहायता
प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि चक्रवात ‘अर्नब’ के कारण प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में फसलों को हुए नुकसान को गंभीरता से लिया गया है। सभी जिला कलेक्टरों को प्रभावित क्षेत्रों में फसल क्षति का तत्काल सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वेक्षण के आधार पर प्रभावित किसानों को आरबीसी 6-4 के प्रावधानों और निर्धारित मानदंडों के अनुसार सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। जिला प्रशासन को राहत संबंधी कार्रवाई प्राथमिकता से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार प्रभावित किसानों के साथ खड़ी है और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में कोई कमी नहीं रखी जाएगी।
खेती के साथ आय के दूसरे विकल्पों पर जोर
किसानों की आर्थिक स्थिति में स्थायी सुधार के लिए केवल पारंपरिक खेती पर निर्भरता कम करना भी जरूरी है। इसी दिशा में राज्य सरकार सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग और कृषि आधारित वैकल्पिक आजीविका को प्रोत्साहित करने पर जोर दे रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जैविक और प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी, पशुपालन तथा मत्स्यपालन जैसी गतिविधियां किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर तैयार कर सकती हैं। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने से कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ खेती की लागत को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है। उन्होंने किसानों से शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने और लाभकारी कृषि पद्धतियों को अपनाने की अपील की।
कृषि बजट में वृद्धि और किसानों के सशक्तिकरण पर केंद्र का जोर
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को विकसित भारत की आधारशिला बताते हुए कहा कि उनकी समृद्धि और आत्मनिर्भरता के बिना देश के विकास का लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने कृषि क्षेत्र में निवेश, उत्पादन वृद्धि, खेती की लागत कम करने और आधुनिक तकनीक तथा वैज्ञानिक अनुसंधान के विस्तार पर जोर दिया। प्रधानमंत्री के अनुसार वर्ष 2013-14 की तुलना में देश का कृषि बजट पांच गुना बढ़ चुका है।
भूमिहीन कृषि मजदूरों को भी आर्थिक संबल
कार्यक्रम में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों और कृषि मजदूरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने धान खरीदी की 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की व्यवस्था को किसान हितैषी कदम बताते हुए कहा कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
वर्मा ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके तहत पात्र भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इससे उन परिवारों को आर्थिक सहारा मिल रहा है, जिनकी आजीविका मुख्य रूप से कृषि मजदूरी पर निर्भर है।
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कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहब ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं के माध्यम से पात्र किसानों तक आर्थिक सहायता सीधे पहुंच रही है। योजना के तहत किसानों को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये डीबीटी के जरिए दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
किसानों की आर्थिक सुरक्षा से ग्रामीण विकास को गति
छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र की मजबूती के लिए आर्थिक सहायता, धान खरीदी, आपदा राहत और आय के वैकल्पिक साधनों को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इन पहलों का वास्तविक लाभ किसानों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचता है, यह खरीदी व्यवस्था, भुगतान की समयबद्धता, नए केंद्रों की संचालन क्षमता और आपदा राहत के क्रियान्वयन से तय होगा। किसानों की आय में स्थायी वृद्धि और खेती को लाभकारी बनाना ही इन योजनाओं की सफलता का असली पैमाना होगा।







