रायपुर। समर्थन मूल्य पर धान बेचने की तैयारी कर रहे किसानों के लिए राहत की खबर सामने आई है। संयुक्त खाते में दर्ज सभी सह-खातेदारों के लिए AgriStack पंजीयन अनिवार्य किए जाने की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब संयुक्त खाते में धान बेचने के लिए सभी सह-खातेदारों का अलग-अलग AgriStack पंजीयन जरूरी नहीं होगा। केवल खाते के लंबरदार का AgriStack पंजीयन होना आवश्यक रहेगा।
बताया जा रहा है कि पंजीयन प्रक्रिया को लेकर किसानों की ओर से लगातार आ रही परेशानियों और मांगों के बाद यह बदलाव किया गया है। संयुक्त खातों में एक से अधिक सह-खातेदार होने के कारण सभी के पंजीयन की प्रक्रिया पूरी करने में किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। नई व्यवस्था से ऐसे किसानों को पंजीयन प्रक्रिया में राहत मिलने की उम्मीद है।
किसानों की परेशानी के बाद बदली व्यवस्था
धान खरीदी के लिए पंजीयन प्रक्रिया पहले ही किसानों के लिए महत्वपूर्ण चरण है। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए किसान पंजीयन और संशोधन की प्रक्रिया 1 जुलाई से 31 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित की गई थी।
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इसी दौरान संयुक्त खातों में सभी सह-खातेदारों के AgriStack पंजीयन की अनिवार्यता को लेकर किसानों के बीच परेशानी और असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। अब व्यवस्था में बदलाव के बाद संयुक्त खाताधारक किसानों को कुछ राहत मिलेगी।
15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीदी
प्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू होने की तैयारी है। खाद्य विभाग की वेबसाइट पर खरीफ वर्ष 2026-27 के लिए धान उपार्जन का ऑनलाइन मॉड्यूल भी उपलब्ध कराया गया है।
प्रशासन की ओर से खरीदी केंद्रों की व्यवस्था, बारदाना, तौल, परिवहन और किसानों से संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। आगामी दिनों में खरीदी प्रक्रिया से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश जारी होने की उम्मीद है।
हजारों किसानों को मिलेगा फायदा
संयुक्त खाते में जमीन दर्ज होने वाले किसान परिवारों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब हर सह-खातेदार को अलग से AgriStack पंजीयन कराने की बाध्यता नहीं होने से पंजीयन प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल होगी।
धान खरीदी व्यवस्था में किसानों की सुविधा सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। ऐसे में पंजीयन से जुड़ी अनिवार्यता में किया गया यह बदलाव खरीफ सीजन में धान बेचने वाले संयुक्त खातेदार किसानों के लिए राहत देने वाला कदम साबित हो सकता है।
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अब नजर इस बात पर रहेगी कि नई व्यवस्था को धान खरीदी केंद्रों और पंजीयन प्रक्रिया में किस तरह लागू किया जाता है और किसानों को इसका वास्तविक लाभ कितनी आसानी से मिल पाता है।







