नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश की राजनीति में जारी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi सहित विपक्षी नेताओं तथा AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की याचिकाओं पर शीर्ष अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इन याचिकाओं में निर्वाचन आयोग द्वारा SIR प्रक्रिया संचालित करने के तरीके और मतदाता सूची में नामों के कथित विलोपन को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर उठे सवाल
Rahul Gandhi और अन्य विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े फैसलों को चुनौती देते हुए प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं की प्रमुख चिंता यह है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम उचित प्रक्रिया, सूचना और सुनवाई का अवसर दिए बिना मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए।
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याचिका में मतदाता सूची से हटाए गए नामों की बूथवार जानकारी और नाम हटाने के कारण सार्वजनिक करने जैसे उपायों की मांग भी शामिल है। विपक्षी नेताओं ने आयोग के निर्णय लेने की प्रक्रिया और संवैधानिक शक्तियों के इस्तेमाल की न्यायिक समीक्षा का अनुरोध किया है।
ओवैसी ने भी दी चुनौती
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी SIR की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उनकी याचिका में निर्वाचन आयोग द्वारा अपनाई जा रही प्रक्रिया, निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुपालन और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। इस मामले में अदालत से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पारदर्शी हो और किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित होने का खतरा न रहे।
27 अक्टूबर की सुनवाई पर नजर
SIR को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत के समक्ष निर्वाचन आयोग की शक्तियों, मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया और पात्र मतदाताओं के हितों की सुरक्षा से जुड़े प्रश्न हैं। हालांकि, याचिकाकर्ताओं की ओर से लगाए गए आरोपों और मांगों पर अंतिम निर्णय अदालत की सुनवाई तथा उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही होगा। मामले में आगे क्या निर्देश दिए जाते हैं, इस पर राजनीतिक दलों और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े पक्षों की नजर बनी हुई है।







