महेंद्र कुमार साहू (9907630081)/रायपुर। RAIPUR NEWS : राजधानी रायपुर के माना क्षेत्र स्थित टेमरी गांव में अवैध प्लाटिंग का खेल खुलेआम जारी है। इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला माना स्थित शारदा विहार क्षेत्र का है, जहां एक सराफा कारोबारी सहित तीन साझेदार कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग कर बेचने का गोरखधंधा चला रहे हैं। इससे राज्य सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है।
गौरतलब है कि इससे पहले 7 जनवरी 2026 को राजस्व विभाग द्वारा अवैध प्लाटिंग पर बुलडोजर कार्रवाई की गई थी। इसके बावजूद दबंगों ने दोबारा गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसकी शिकायत CMO और रायपुर तहसीलदार से की जा चुकी है। लेकिन अब तक भू-माफियाओं पर न तो FIR दर्ज की गई और न ही रजिस्ट्री को शून्य घोषित किया गया, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
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सूत्रों के अनुसार, सराफा कारोबारी से बिल्डर बने दबंग अब फिर से अवैध प्लाटों की रजिस्ट्री कराने की तैयारी में हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या पहले की कार्रवाई सिर्फ दिखावा थी? क्या भू-माफिया को कहीं न कहीं संरक्षण मिल रहा है?
पूर्व कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी थी कि भविष्य में अवैध प्लाटिंग नहीं की जाएगी। बावजूद इसके, कुछ ही दिनों बाद तोड़ी गई सड़क का फिर से निर्माण कर अवैध प्लाटिंग शुरू कर दी गई।
RAIPUR NEWS : इस मामले में रायपुर तहसीलदार राममूर्ति दीवान ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि “जितनी बार अवैध प्लाटिंग होगी, उतनी बार कार्रवाई की जाएगी। दोबारा अवैध प्लाटिंग की जानकारी मिली है, फिर से कार्रवाई करेंगे। अगर रजिस्ट्री हो रही है तो यह रजिस्ट्रार का विषय है।”
जानकारी के अनुसार करीब 2200 वर्गफीट के 39 प्लॉट काटे जा चुके हैं, जिनमें से 20 से अधिक प्लॉट बेचे जा चुके हैं। कई लोगों से एडवांस लेकर बुकिंग भी कर ली गई है। यानी दर्जनों लोग अवैध कॉलोनी के नाम पर ठगी का शिकार हो चुके हैं, लेकिन उनके हितों की रक्षा के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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बताया जा रहा है कि शारदा विहार के पास, अटल एक्सप्रेस-वे से महज एक किलोमीटर दूरी पर कृषि भूमि पर बिना रेरा पंजीयन, बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की अनुमति और बिना डायवर्जन खुलेआम प्लॉट काटकर बेचे जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार 1650 रुपये प्रति वर्गफीट की दर से प्लॉट बेचे जा रहे हैं। यह भी सामने आया है कि भूमि का कुछ हिस्सा सरकारी जमीन का हो सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सब कुछ प्रशासन को ज्ञात है, तो कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?
RAIPUR NEWS : CMO की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कभी वे कहते हैं कि तहसीलदार को जानकारी दे दी गई है और जब तहसीलदार से संपर्क किया जाता है तो वे कहते हैं कि उन्हें मीडिया से जानकारी मिली है। ऐसे में सच कौन बोल रहा है? भू-माफिया को संरक्षण कौन दे रहा है? खसरा नंबर 426/8 एक सराफा कारोबारी सहित अन्य लोगों के नाम दर्ज है। सूत्रों का दावा है कि कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी इस पूरे मामले में संदिग्ध है।
अब सवाल सिर्फ अवैध प्लाटिंग का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम का है। जब नियम स्पष्ट हैं — रेरा पंजीयन, टीएनसी की अनुमति और डायवर्जन अनिवार्य है — तो फिर यह अवैध प्लाटिंग किसके संरक्षण में फल-फूल रही है?
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कार्रवाई केवल सड़क तोड़ने तक सीमित क्यों है? भू-माफिया पर FIR दर्ज करने से परहेज क्यों किया जा रहा है? क्या खसरा नंबर को बैन किया जाएगा? और क्या प्रशासन वास्तव में इस नेटवर्क को तोड़ेगा या सिर्फ खानापूर्ति करेगा?
स्पष्ट है कि जब तक आपराधिक प्रकरण दर्ज कर सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक भू-माफिया प्रशासन को खुली चुनौती देते रहेंगे।
RAIPUR NEWS : अगले पार्ट में उन चेहरों को बेनकाब किया जाएगा जिनके संरक्षण में यह पूरा अवैध खेल फल-फूल रहा है। साथ ही एक चौंकाने वाला स्टिंग ऑपरेशन भी दिखाया जाएगा, जिसमें कुछ सरकारी कर्मचारी उसी जमीन को बेचने की बात करते हुए और ग्राहकों की तलाश करते हुए कैमरे में कैद हुए हैं।







