रायपुर। Chhattisgarh में पारंपरिक हाथकरघा उद्योग को मजबूती देने और बुनकरों एवं महिला स्व सहायता समूहों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए ग्रामोद्योग विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में प्रदेश की बुनकर सहकारी समितियों और महिला स्व सहायता समूहों को पारिश्रमिक के रूप में 9 करोड़ 41 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। यह राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में आरटीजीएस के माध्यम से हस्तांतरित की गई है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा और ग्रामोद्योग मंत्री गजेन्द्र यादव के निर्देशानुसार ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा (आईएएस) के नेतृत्व में यह भुगतान किया गया है। विभाग का उद्देश्य हाथकरघा क्षेत्र से जुड़े लोगों को नियमित काम उपलब्ध कराने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है।
28 जिलों की बुनकर समितियों को मिला भुगतान
राज्य हाथकरघा संघ के माध्यम से अक्टूबर 2026 में प्रदेश के 28 जिलों की 302 बुनकर सहकारी समितियों को 7 करोड़ 60 लाख रुपये का पारिश्रमिक भुगतान किया गया। इसके अतिरिक्त 3 नवंबर 2026 को 49 बुनकर सहकारी समितियों को 1 करोड़ 50 लाख रुपये तथा 128 महिला स्व सहायता समूहों को 31 लाख रुपये की राशि हस्तांतरित की गई। इस प्रकार बुनकर सहकारी समितियों और महिला स्व सहायता समूहों को कुल 9 करोड़ 41 लाख रुपये का भुगतान किया गया। राशि सीधे बैंक खातों में पहुंचने से पारिश्रमिक वितरण में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास किया गया है।
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हाथकरघा क्षेत्र में 78 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान
वित्तीय वर्ष 2026-27 में 3 नवंबर 2026 तक राज्य हाथकरघा संघ द्वारा बुनकरों और महिला स्व सहायता समूहों को विभिन्न मदों में भुगतान किया गया है। उपलब्ध विभागीय जानकारी के अनुसार, 345 बुनकर सहकारी समितियों को बुनाई पारिश्रमिक के रूप में 5,487.00 लाख रुपये तथा 2,005 महिला स्व सहायता समूहों को गणवेश सिलाई पारिश्रमिक के रूप में 2,117.00 लाख रुपये वितरित किए गए हैं। इसके अलावा बुनकरों की आकस्मिक मृत्यु होने पर 29 आश्रित परिवारों को 5.80 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। हाथकरघा क्षेत्र में पुरस्कृत 11 हितग्राहियों को 3.74 लाख रुपये की मासिक आर्थिक सहायता भी वितरित की गई। विभागीय जानकारी के अनुसार, इन मदों में कुल 7,813.54 लाख रुपये का भुगतान सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में आरटीजीएस के माध्यम से किया गया है। यह राशि हाथकरघा उद्योग से जुड़े परिवारों को आर्थिक सहयोग देने और पारंपरिक रोजगार को निरंतर बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
स्थानीय उत्पादन और रोजगार पर जोर
राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप ग्रामोद्योग विभाग बुनकरों को बुनाई कार्य और महिला स्व सहायता समूहों को गणवेश सिलाई जैसे कार्यों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध करा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में काम के अवसर बढ़ाने और पारंपरिक कौशल को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
विभाग द्वारा वोकल फॉर लोकल की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक कारीगरी और समूह आधारित रोजगार को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रदेश में उपलब्ध कौशल और संसाधनों का उपयोग कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है।
पुनर्वासित महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई से जोड़ने की पहल
ग्रामोद्योग विभाग द्वारा सुकमा, बस्तर, कोरबा और जशपुर जिलों की 30 पुनर्वासित महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ने की पहल की जा रही है। इन महिलाओं को राज्य हाथकरघा संघ के अनुपयोगी एवं कटपीस वस्त्रों से विभिन्न उपयोगी उत्पाद तैयार करने का कार्य दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत खितौना, थैला और वाटर बैग जैसे उत्पाद बनाने के लिए कार्यादेश उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही महिलाओं को उनके घर पर ही निःशुल्क सिलाई मशीन उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य पुनर्वासित महिलाओं को आर्थिक आय का नया साधन उपलब्ध कराना और उन्हें घर से ही रोजगार करने का अवसर देना है। प्रशिक्षण, कार्यादेश और सिलाई मशीन की सुविधा के माध्यम से महिलाओं को उत्पादन कार्य से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
पारंपरिक उद्योग को आर्थिक मजबूती देने की दिशा में प्रयास
छत्तीसगढ़ में हाथकरघा और सिलाई कार्य से जुड़े बुनकरों एवं महिला स्व सहायता समूहों को पारिश्रमिक भुगतान और रोजगार उपलब्ध कराने की पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। स्थानीय स्तर पर उत्पादन, पारंपरिक कौशल का उपयोग और समूह आधारित रोजगार के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप ग्रामोद्योग विभाग द्वारा किए जा रहे इन प्रयासों से प्रदेश के बुनकरों, महिला स्व सहायता समूहों और पुनर्वासित महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।







