मुम्बई : सेना की वर्दी पहनने का सपना लेकर निकले एक युवा ने यह नहीं सोचा था कि किस्मत उसे कैमरे के सामने खड़ा कर देगी। R. Madhavan का सपना भारतीय सेना में जाने का था, लेकिन ज़िंदगी ने उन्हें एक अलग रास्ता दिखाया। सपने बदले, पर मेहनत और अनुशासन नहीं बदला। यही वजह है कि असफलता उनके लिए अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत बन गई। फ़िल्म रहना है तेरे दिल में से लोकप्रियता पाने वाले माधवन ने कभी आसान रास्ता नहीं चुना।
अलाईपायुथे, मिन्नाले, रंग दे बसंती, 3 इडियट्स, तनु वेड्स मनु और विक्रम वेधा जैसी फ़िल्मों में उन्होंने रोमांस, यथार्थ और जटिल मानवीय भावनाओं को पूरे सच के साथ पर्दे पर उतारा। वे उन चुनिंदा कलाकारों में हैं जिन्होंने हिंदी और दक्षिण भारतीय सिनेमा के बीच की दूरी को सहज अभिनय से पाट दिया। एक अभिनेता से आगे बढ़कर माधवन ने रॉकेट्री: द नांबी इफ़ेक्ट के ज़रिए भारतीय वैज्ञानिक नांबी नारायणन की कहानी दुनिया तक पहुँचाई।
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इस फ़िल्म में उन्होंने अभिनेता, लेखक और निर्देशक—तीनों भूमिकाएँ निभाईं। सिनेमा के ज़रिए समाज, विज्ञान और देश की अनकही कहानियों को सामने लाने के उनके प्रयासों के लिए उन्हें Padma Shri से सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल एक कलाकार का नहीं, बल्कि उस विश्वास का है कि अगर इरादे मज़बूत हों, तो मंज़िल अपना रास्ता खुद बना लेती है।
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