रायपुर। Raipur DEO Office Fire Incident : रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में 17 जनवरी 2026 की देर रात लगी भीषण आग को पांच महीने होने जा रहे हैं, लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो पाई है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर जांच में देरी क्यों हो रही है और किसे बचाने की कोशिश की जा रही है?
इस अग्निकांड में शिक्षा विभाग के कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जलकर खाक हो गए थे। शिक्षकों के सर्विस रिकॉर्ड, छात्रवृत्ति संबंधी फाइलें, मिड-डे मील योजना के दस्तावेज और निजी स्कूलों की मान्यता से जुड़े रिकॉर्ड आग की भेंट चढ़ गए थे। आग इतनी भीषण थी कि उसकी लपटें लगभग एक किलोमीटर दूर तक दिखाई दे रही थीं।
Raipur DEO Office Fire Incident :घटना के बाद प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट को आग लगने का कारण बताया गया, लेकिन जैसे-जैसे मामले की परतें खुलती गईं, वैसे-वैसे संदेह भी गहराता गया। राज्य सरकार ने संभागीय संयुक्त संचालक संजीव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति को मात्र पांच दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन पांच महीने बाद भी रिपोर्ट का इंतजार जारी है।
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विवाद उस समय और बढ़ गया जब जांच पूरी होने से पहले ही आग से प्रभावित भंडार कक्ष को तोड़ दिया गया। मलबा हटाने और भवन को ध्वस्त करने की जल्दबाजी पर कई सवाल खड़े हुए। विपक्षी कांग्रेस ने इसे शिक्षा विभाग में हुए कथित भ्रष्टाचार और घोटालों से जुड़ी फाइलों को मिटाने की साजिश बताया था।
Raipur DEO Office Fire Incident : मामले की जांच के लिए पहुंची फोरेंसिक टीम ने भी कथित तौर पर पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई थी। फोरेंसिक विशेषज्ञों ने सवाल उठाया था कि जांच से पहले भवन को तोड़ने और मलबा हटाने की इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई। साथ ही घटनास्थल की सुरक्षा में लापरवाही को लेकर भी गंभीर आपत्ति दर्ज की गई थी। इससे सबूतों के नष्ट होने की आशंका और मजबूत हुई।
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अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जांच समिति को पांच दिनों में रिपोर्ट देनी थी, तो पांच महीने बाद भी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं हुई? क्या जांच अभी भी पूरी नहीं हुई है या फिर रिपोर्ट को जानबूझकर रोका जा रहा है? यदि आग महज एक दुर्घटना थी, तो रिपोर्ट जारी करने में इतनी देरी का क्या कारण है?
शिक्षा विभाग, जांच समिति और शासन की चुप्पी कई नए सवाल पैदा कर रही है। जनता जानना चाहती है कि इस आग में केवल दस्तावेज जले थे या फिर किसी बड़े सच को भी आग की राख में दबाने की कोशिश की जा रही. जब तक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक “किसे बचाने की साजिश चल रही है?” यह सवाल लगातार गूंजता रहेगा।






