नई दिल्ली। Supreme Court : सर्वोच्च अदालत ने क्रिकेट सहित अन्य खेल संघों के संचालन पर गहरी नाराज़गी जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा खेल संस्थाओं का नेतृत्व ऐसे लोगों के हाथों में होना चाहिए, जो खेल की बुनियादी समझ रखते हों। अदालत ने कटाक्ष करते हुए कहा है दुर्भाग्यवश क्रिकेट संघों में आज ऐसे लोग प्रभावशाली पदों पर बैठे हैं, जिन्हें “बैट पकड़ना तक नहीं आता”, जबकि खेल की असली पहचान खिलाड़ियों से होती है। यह टिप्पणी महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) के चुनाव से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सामने आई।
MCA चुनाव पर रोक हटाने से इनकार
Supreme Court : चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें MCA के चुनाव पर रोक लगाई गई थी। ये चुनाव 6 जनवरी 2026 को प्रस्तावित थे, लेकिन उन पर भाई-भतीजावाद, पक्षपात और वोटर लिस्ट में हेरफेर के गंभीर आरोप लगे थे।सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस स्तर पर हाईकोर्ट के आदेश में दखल नहीं देगा और संबंधित पक्ष अपनी आपत्तियां वहीं रखें।
Read More : Supreme Court ने ED को लगाई फटकार, कहा-साक्ष्य के आधार पर हो कार्यवाही, मनमानी कतई नहीं…
अचानक बढ़ी सदस्यता पर अदालत की आपत्ति
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने MCA की सदस्यता में अचानक हुई असामान्य वृद्धि पर सवाल उठाए। मुख्य न्यायाधीश ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि 1986 से 2023 तक एसोसिएशन में केवल 164 सदस्य थे, लेकिन इसके बाद बहुत कम समय में बड़ी संख्या में नए सदस्य जोड़ दिए गए।
CJI ने सवाल उठाया
Supreme Court : “इतने वर्षों तक सीमित सदस्य और फिर अचानक यह ‘बंपर ड्रॉ’ कैसे हो गया?” उन्होंने टिप्पणी की कि यदि सदस्य संख्या बढ़ाकर 300 तक करनी थी, तो इसमें पूर्व अंतरराष्ट्रीय और नामी क्रिकेटरों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी, न कि ऐसे लोगों को जिनका खेल से कोई सीधा सरोकार नहीं है।







